भगवान को प्याज और लहसुन का भोग क्यों नहीं चढ़ाया जाता? 🧄

क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान को प्याज और लहसुन से बने भोजन का भोग क्यों नहीं चढ़ाया जाता? दरअसल, इसके पीछे कहानी समुद्र मंथन के समय की है।
समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश बाहर निकला, तब देवता और असुर दोनों पक्ष उसे पाना चाहते थे। तभी भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया और अमृत देवताओं को पिला दिया।
असुर मोहिनी की सुंदरता में खो गए। उस समय उनको बस मोहिनी का सुंदर रूप दिख रहा था। लेकिन एक असुर जिसका नाम स्वर्भानु था, उसे शक हुआ कि मोहिनी असुरों को अमृत नहीं दे रही। इसलिए, देवता का रूप बनकर सूर्यदेव और चंद्रदेव के बीच में बैठ गया ताकि उसे भी अमृत पीने का मौका मिल जाए।
फिर मोहिनी ने उसे भी देवता समझकर अमृत पिला दिया, लेकिन जैसे ही स्वर्भानु ने अमृत पिया, तभी सूर्यदेव और चंद्रदेव ने पहचान लिया कि यह कोई देवता नहीं बल्कि असुर है। उसी दौरान भगवान विष्णु अपने असली रूप में आए और तुरंत सुदर्शन चक्र चलाकर उसके सिर को धड़ से अलग कर दिया।
इसके बाद, उसका सिर राहु और धड़ केतु कहलाया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। जब स्वर्भानु का सिर कटा था, तो उसके शरीर की खून की कुछ बूंदें जमीन पर गिरीं। क्योंकि उसने अभी-अभी अमृत पिया था, इसलिए उसके खून में भी अमृत का अंश था।
फिर जहां-जहां उसके खून की बूंदें गिरीं, वहां से कुछ फसल उग गईं। कहा जाता है कि वो फसल कुछ और नहीं, बल्कि प्याज और लहसुन थे, जिनको तामसिक भोजन कहा जाता है। और यही कारण है कि पूजा-पाठ में प्याज और लहसुन का उपयोग नहीं किया जाता है।