सीएम मोहन यादव संपत्ति विवाद
शिव की नगरी उज्जैन में ज़मीन की चोरी हुई है और यह चोरी की है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार ने। यह कहना है कांग्रेस और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का।देखिए, पहली बात तो आपको यह पता होनी चाहिए कि डॉ. मोहन यादव कोई गरीब आदमी नहीं हैं।
उनके परिवार का 2010 से ही hotel, ज़मीन, building construction, फ्लैट बनाने-बेचने का बिज़नेस रहा है।दूसरी बात यह है कि डॉ. मोहन यादव 2013 से लगातार विधायक हैं। 2013 के चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्ति ₹16 करोड़ थी।2018 में ₹31 करोड़ थी, 2023 में ₹42 करोड़ थी।
यानी कि उनकी संपत्ति कोई दिन दुगनी-रात चौगुनी नहीं बढ़ी है। उन्होंने मेहनत की है, पैसा कमाया है और बकायदा चुनावी हलफनामे में दिखाया भी है। लेकिन मोहन यादव को हमेशा उनके यादव होने की वजह से टारगेट किया गया है। अब एक यादव व्यक्ति एक राज्य का मुख्यमंत्री कैसे बन गया, यह बात कांग्रेस और कुछ लोगों को पच नहीं रही है।
अब तीसरी बात यह है कि अब उनके परिवार की जो प्रॉपर्टी की बात हो रही है वह इसलिए क्योंकि मोहन यादव ने हाल ही में कांग्रेस को एक राज्यसभा की सीट पर मात दी थी। तो कांग्रेस की तरफ से यह प्रोपेगैंडा सारा चलाया जा रहा है। लेकिन कांग्रेस वालों को कोई रॉबर्ट वाड्रा के बारे में भी ज़रा याद दिलाए।
चौथी बात यह है कि जब सौरभ द्विवेदी ‘लल्लनटॉप’ में थे, तब उन्होंने खुद डॉ. मोहन यादव से उनकी ज़मीन के बारे में, उनकी संपत्ति के बारे में जानकारी ली थी।लेकिन अब जब वह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ चैनल में गए हैं, तो वह इस बात का मुद्दा बना रहे हैं।
मुद्दा बनाएँ वह ठीक है, लेकिन सौरभ द्विवेदी एक बार तो कमलनाथ जी और उनके परिवार की संपत्ति पर भी बात होनी चाहिए।कुल मिलाकर बात इतनी है कि एक बेहतर काम करने वाले मुख्यमंत्री को उसके पद से हटाने के लिए ना जाने कितनी चालें चली जा रही हैं।लेकिन अफ़सोस, ना तो संयंत्रकर्ता पहले सफ़ल हो पाए और ना ही अब सफ़ल होंगे और ना ही कभी आगे सफ़ल हो पाएँगे।